झारखंड प्लेन क्रैश की सही जानकारी कभी पता नहीं चलेगी ? विमान में ब्लैक बॉक्स ही नहीं था

झारखंड में हुए एयर एंबुलेंस क्रैश की शुरुआत की जांच में पता चला है कि प्लेन में ‘ ब्लैक बॉक्स’ मौजूद नहीं था यह किसी भी विमान हादसे की जांच में सबसे हम सबूत माना जाता है इस बॉक्स में कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर यानी CVR या फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर (FDR) होता है ये दोनों को एक बॉक्स में रखा जाता है इसमें पायलट और को पायलट की वॉइस रिकॉर्ड और फ्लाइट के कई सारे डेटा को रिकार्ड करता है।
23 फरवरी को यह एयर एंबुलेंस रांची से दिल्ली के लिए रवाना हुई थी लेकिन शाम करीब 7 बजे प्लेन का एयर ट्रैफिक कंट्रोल से संपर्क टूट गया, एयरप्लेन चतरा जिला के सिमरिया थाना इलाके में स्थित जंगल में क्रैश हो गया, यह एयर एम्बुलेंस मरीज को लेकर दिल्ली जा रहा था प्लेन में एक डॉक्टर, एक पैरामेडिक, दो अटेंडेंट और एक को पायलट समेत 7 लोग सवार थे हादसे में सभी लोगों की मौत हो गई।
क्यों नहीं था ब्लैक बॉक्स
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक हादसे का शिकार हुए प्लेन रेडबर्ड एयरवेज प्राइवेट लिमिटेड का ‘ बीचक्राफ्ट C90’ था इससे साल 1987 में बनाया गया था इसका अधिकतम टेक अप वजन 4583 किलोग्राम था, इसका पहला ‘ सर्टिफिकेट आप एयरवर्दीनेस’ साल 1987 में जारी किया गया था, जब इस प्लेन का सर्टिफिकेट आप एयरवर्दीनेस जारी किया गया उस समय सर्टिफिकेशन के वक्त प्लेन में CVR या एफडीआर(FDR) इंस्टॉल करने की कोई जरूरत नहीं थी.
सर्टिफिकेट आप एयरवर्दीनेस नियमों के मुताबिक CVR यानी कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर (CVR) उन प्लेन के लिए जरूरी है जिनका टेक टेक अप वजन 5700 किलोग्राम से ज्यादा है क्योंकि बीचक्राफ्ट C90 प्लेन का वजन इससे कम है इसलिए यह कॉकपिट वॉइस रिकॉर्डर (CVR )के नियमों में नहीं आता ऐसे ही कुछ नियम फ्लाइट डाटा रिकॉर्डर यानी (FDR )को लेकर है नियम कहते हैं कि 1 जनवरी 1990 को या उसके बाद जारी होने वाले प्लेनों में एफडीआर(FDR) होना जरूरी है लेकिन बीचक्राफ्ट C90 1987 में जारी हुआ था इसलिए यह एफडीआर यानी फ्लाइट डाटा रिकॉर्डर के नियमों में भी नहीं आता था इसी वजह से प्लेन में ब्लैक बॉक्स नहीं था।
ब्लैक बॉक्स क्या है
यह स्टील और टाइटेनियम से बना एक रिकॉर्डिंग डिवाइस होता है जो किसी भी तरह की दुर्घटना में ये खराब नहीं होता न ही ये भयंकर से भयंकर आग में भी नहीं जलता है, ये संतरा कलर की होता हैं, जो आग में जलने पर भी अंदर का डेटा सुरक्षित रहता है। ब्लैक बॉक्स दो तरह के रिकॉर्डर होते है . फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर (FDR) और कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर (CVR).
जो फ्लाइट में पालयट और को पायलट और कई तरह के सिंगल एवं तकनीकी डेटा रिकार्ड होते रहते हैं।
कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर (CVR)
यह कॉकपिट में होने वाली पायलट और को पायलट के बीच की बातों को और कॉकपिट की बाकी आवाजों को रिकॉर्ड करता है. यह रेडियो में हो रही उन बातों को भी रिकॉर्ड करता है जो कॉकपिट और एटीसी (Air Traffic control) के बीच होती हैं , एयर ट्रैफिक कंट्रोल का मतलब ग्राउंड का वो स्टाफ जो फ्लाइट को उड़ाने में मदद करता है , एटीसी रेडियो के माध्यम से पूरी उड़ान के दौरान पायलट की संपर्क में होती हैं।
फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर (FDR)
FDR में कई सारे डेटा जैसे विमान की स्पीड, विमान की ऊंचाई, प्लेन का वर्टिकल और उड़ान के ट्रैक को रिकॉर्ड करता है। इसके अलावा यह इंजन की जानकारी जैसे फ्लो और थ्रस्ट जैसी जानकारी भी रिकॉर्ड करता है , फ्लाइट कंट्रोल, दबाव, ईंधन,जैसे 90 प्रकार के आंकड़ों को भी पिछले 24 घंटे से अधिक की रिकॉर्डेड जानकारी भी FDR में होती है।
क्रैश की सही जानकारी मुश्किल
झारखंड प्लेन क्रैश मामले में AAIB ने इस पूरे मामले को जाँच कर रही है, लेकिन अगर प्लेन में ब्लैक बॉक्स नहीं है तो AAIB को जाँच में दिक्कत होगी, प्लेन क्रैश के अन्तिम क्षण को पायलट और पायलट के बीच क्या बात हुआ , और क्रैश के समय प्लेन की ऊंचाई, स्पीड और भी कई तरह की डेटा की सही जानकारी मुश्किल है,
AAIB को एयर ट्रैफिक कंट्रोल के साथ हुई आखिरी बातचीत और क्रैश साइट पर मिले सबूतों के आधार पर निर्भर रहना होगा।
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