Petrol Price tax structure india

ईरान-इजरायल युद्ध से तेल का महा-संकट: क्या भारत में ₹150 होगा पेट्रोल? जानें कच्चे तेल का पूरा गणित!

ईरान – इजरायल और अमेरिका के बीच चल रहे युद्ध ना सिर्फ तीन देश का युद्ध है बल्कि इसका आर्थिक असर पूरी दुनिया में देखने को मिलेगा, दुनिया के कई देशों में आर्थिक हालत बिगड़ सकते हैं, महंगाई बढ़ सकता है, अगर यह युद्ध और ज्यादा लंबा खिंचा तो फिर कई देशों में महंगाई आसमान छूने लगेगी, यह सब इसलिए नहीं होगा कि इजरायल – ईरान और अमेरिका का युद्ध बल्कि इसका सीधा असर होगा ऊर्जा आपूर्ति संकट जो किसी भी देश के लिए सबसे जरूरी और अहम है आज के समय में,

इस युद्ध से न सिर्फ वैश्विक स्तर पर महंगाई बढ़ेगी बल्कि इसका असर कई देशों की आर्थिक स्थिति को भी डगमगा देगी ऐसे में आज हम बात करने वाले हैं कच्चे तेल के बारे में जो किसी भी देश के लिए सबसे अहम होता है और इस युद्ध से पूरे वैश्विक स्तर पर तेल संकट की स्थिति उत्पन्न हो गया है जिससे तेल की कीमत में बढ़ोतरी और इससे देश में बढ़ने वाला खर्च उस देश की महंगाई को और भी बढ़ा सकता है।

हम इस पोस्ट पर जानेंगे कि भारत तेल कहा से खरीदता है , कितने रुपए प्रति लीटर खरीदता है? , कैसे भारत लाता है? केंद सरकार कितना टैक्स लेता है, राज्य सरकार कितना टैक्स लेता है, तेल कंपनियां कितना मुनाफा कमाते हैं?, हर राज्य में पेट्रोल डीजल की कीमत अलग अलग क्यों होता है?, और भारत में कच्चा तेल सप्लाई बंद हो जाए तो कितना स्टोर कर रखा है?

 

विश्व में तेल आपूर्ति की संकट

ईरान अमेरिका इजराइल का युद्ध का सबसे बड़ा असर वैश्विक स्तर पर तेल की आपूर्ति और इससे भी ज्यादा असर ईरान के रास्ते से आने वाली विश्व के लगभग 25 प्रतिशत कच्चे तेल और गैस ईरान के इसी रास्ते ही आता है, ऐसे में ईरान ने उस रास्ते को पूरी तरह से बंद कर दिया है, जिसे कहा जाता है होमुर्ज जलडमरूमध्य.

यह ईरान की अधिकार क्षेत्र में आने वाला होमुर्ज जलडमरूमध्य 39 किलोमीटर का समुद्री मार्ग है जिसमें दुनिया के लगभग 25 प्रतिशत तेल और गैस आपूर्ति इसी रास्ते से की जाती है भारत में इस रास्ते से 40% तेल और ऊर्जा की आपूर्ति की जाती है अब इस रास्ते को ईरान ने पूरी तरह से बंद कर दिया है सिर्फ चीन के लिए खुला है, ऐसे में तेल और ऊर्जा आपूर्ति संकट पूरे वैश्विक स्तर पर होगा।

 

भारत में तेल आपूर्ति

भारत में कच्चे तेल की खरीदी से लेकर आपकी गाड़ी के टंकी तक पहुंचने की प्रक्रिया बहुत ही जटिल होता है इसे कई चरणों से गुजर कर अंतिम रूप में आपकी गाड़ी के टंकी तक पहुंचाया जाता है, भारत अपने जरूरत का लगभग 85% आयात करता है, ऐसे में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल हमारे देश के अर्थव्यवस्था पर सीधा असर डाल सकता है,

अगर युद्ध के हालात ऐसे ही बने रहे तो फिर आने वाले समय में हमारे देश में पेट्रोल और डीजल के रेट भी बढ़ जाएंगे, जिसका सीधा असर देश के आम जनता को पड़ने वाला है।

 

भारत में कच्चे तेल की खरीदी

भारत में कच्चे तेल की खरीदारी मुख्य रूप से सरकारी कंपनियों Indian Oil, BPCL, HPCLऔर निजी कंपनियां Reliance, nayara जैसे कंपनियां करते हैं। यह कंपनियां विश्व के कच्चे तेल उत्पादक देश से खरीदारी करते हैं, वर्तमान में हमारे देश लगभग 40 देशों से कच्चे तेल और ऊर्जा की आपूर्ति करता है,

भारत सबसे ज्यादा कच्चे तेल की खरीदारी खाड़ी देशों से जैसे ईरान, इराक, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और रूस से करता है,

 

कैसे होती है खरीदारी

भारत सहित दुनिया के सभी देश तेल उत्पादक देश से वार्षिक अनुबंध या स्पॉट मार्केट के रूप में खरीदारी करते हैं,

1. टर्म अनुबंध – इसके तहत तेल उत्पादक देश से साल भर के लिए फिक्स सप्लाई का अनुबंध किया जाता है।

2. स्पॉट मार्केट -इसके तहत तेल की तत्काल जरूरत के हिसाब से मौजूद कीमत में खरीदारी करना।

 

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल की कीमत

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल की कीमत और मात्रा बैरल प्रति डॉलर होता है, अभी वैश्विक स्तर पर तेल का ताजा कीमत में बढ़ोतरी किया गया है जो अब लगभग प्रति बैरल 90 डॉलर हो गया है, अमेरिका ईरान और इजरायल के युद्ध से पहले कच्चे तेल की कीमत प्रति बैरल 65 डॉलर था, वैश्विक स्तर पर तेल खरीदी डॉलर में होता है, जो अभी $1 भारतीय रुपया में 92 रुपए के बराबर है।

वैश्विक स्तर पर तेल मापने के लिए बैरल का उपयोग किया जाता है, एक बैरल में 159 लीटर कच्चे तेल होता है, भारत अपनी तेल खरीदी 60 से 65 डॉलर प्रति बैरल खरीदता है, जो प्रति लीटर पेट्रोल, डीजल भारतीय रुपए में 40 से 45 रुपए के बीच पड़ता है।

 

कीमत का निर्धारण

भारत जो भी तेल खरीदता है उसका औसत कीमत को इंडियन बॉस्केट आफ क्रूड ऑयल (Indian basket of crude oil) कहा जाता है, इसका निर्धारण दो तरह से होता है।

Oman /dubai (Sour grade) लगभग 78.71%

Brent crude। ( Sweet grade) लगभग 21.29%

 

समुद्री परिवहन और बंदरगाह खर्च

भारत जब किसी भी देश से कच्चे तेल खरीदना है तो उसे भारत लाने के लिए समुद्री मार्ग का उपयोग किया जाता है, क्योंकि इसके अलावा कोई और रास्ता नहीं है जिसे इतना मात्रा में कच्चे तेल लाया जा सके, इसके लिए बड़े-बड़े जहाज का उपयोग किया जाता है, जहाज वहां से तेल लाकर भारतीय बंदरगाह पर जैसे जामनगर, पारादीप मुंद्रा या विशाखापट्टनम लाया जाता है।

समुद्री मार्ग से लाने के लिए कंपनियों को कई तरह के खर्च लगते हैं, तेल लाने के लिए समुद्री किराया, जिस जहाज में तेल लाया जा रहा है उस जहाज का बीमा, क्योंकि समुद्र में कई तरह की जोखिम हो सकते हैं इसके अलावा बंदरगाहों में लोडिंग और खाली करने का खर्च भी शामिल होता है।

 

कच्चे तेल की रिफाइनरी

जब किसी बंदरगाह में कच्चे तेल की खाली कराई जाती है इसके बाद इसे डायरेक्ट उपयोग नहीं किया जा सकता बल्कि इसे सबसे पहले रिफाइनरी किया जाता है, इसके लिए जामनगर, मथुरा या फिर कोच्चि रिफाइनरी भेजा जाता है, जहां अलग-अलग तापमान में कच्चे तेल को ईंधन के रूप में तैयार किया जाता है जैसे पेट्रोल, डीजल, केरोसिन, जेट फ्यूल, एलपीजी आदि।

रिफाइनरी करने के बाद कंपनी रिफाइनरी चार्ज और और कंपनी का मुनाफा निकालकर मार्केटिंग कंपनी को बेचा जाता है।

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मार्केटिंग और वितरण

तेल रिफाइनरी होने के बाद ईंधन के रूप में तैयार हो जाता है पेट्रोल, डीजल, केरोसिन, एलपीजी और जेट फ्यूल इस देश भर के अलग-अलग डिपो में भेजा जाता है, और वहां से पेट्रोल डीजल पंप तक पहुंचता है,

देश भर के अलग-अलग कोने डिपो और पेट्रोल पंप तक पहुंचने में, रेल, पाइपलाइन, टैंकर्स की खर्च को तेल कंपनियों (HPCL,IOCL ) इसका भी खर्च जोड़कर और अपना मुनाफा निकाल कर पेट्रोल टंकी तक पहुंचाते हैं।

 

पेट्रोल डीजल की अंतिम कीमत

जब पेट्रोल और डीजल रिफाइनरी होकर पेट्रोल टंकी तक पहुंचाते हैं उसमें कई तरह के खर्च जुड़े होते हैं, जब कच्चे तेल को बैरल प्रति डॉलर खरीदा जा रहा था तब 40 से 45 प्रति लीटर था लेकिन टंकी में पहुंचने के बाद उसकी कीमत किसी राज्य में 95 तो किसी राज्य में 101 तो किसी राज्य में 109 हो जाता है,

हर राज्य में अलग अलग कीमत क्यों?

जब तेल कंपनियां तेल खरीदकर देश में सप्लाई करते हैं तो केंद्र सरकार तेल कंपनियों से उत्पाद शुल्क (Excise duty) लेता है , जो पेट्रोल का 19- 25 रूपये तक और डीजल का 15 – 20 रूपये हो सकता है , इसके बाद जिस राज्य में बेचा जाता है उस राज्य सरकार, तेल कंपनियों से VAT Tax लेता है जो पेट्रोल में 15-20 रूपये और डीजल में 12 -17 रुपए तक होता है।

प्रकार पेट्रोल डीजल
विदेश में कच्चे तेल
की  कीमत
40-45 रू 42-47 रू
समुद्र के रास्ते भाड़ा
रिफाइनरी खर्च
4-6 रू 5-8 रू
OMC मार्जिन और
लॉजिस्टिक्स
3- 4 रू 3-4 रू
डीलर कमीशन
(औसत)
3.80 रू 2.60 रू
केंद्रीय उत्पाद शुल्क
केंद सरकार
19 – 25 रू 15- 20 रू
राज्य का वेट
VAT Tax
15- 20 रू 12- 16 रू
अंतिम खदरा मूल्य 90-105 रू 85- 95 रू

हर राज्य में VAT Tax अलग अलग होता है जिस राज्य में राज्य सरकार जितना ज्यादा VAT Tax लेता है उस राज्य में पेट्रोल और डीजल की कीमत उतना ज्यादा होता है। यही वजह है कि हर राज्य में अलग अलग पेट्रोल, डीजल की कीमत होती है।

 

पेट्रोल डीजल की रेट कैसे घटता, बढ़ता है

कभी-कभी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल की कीमत में बढ़ोतरी न हो, इसके बाद भी देश में और राज्य में तेल की कीमत घटती- बढ़ती है इसका कारण होता है केंद्र सरकार की एक्साईज ड्यूटी Excise Duty में बढ़ोतरी या फिर राज्य सरकार की VAT Tax में बढ़ोतरी की वजह से होता है, कभी कभी राज्य सरकार VAT Tax में बढ़ोतरी करता है तो उस राज्य में पेट्रोल और डीजल की कीमत बढ़ती है।

और कभी केंद सरकार Excise Duty में बढ़ोतरी करता है तो देश भर में कीमत बढ़ती है।

भारत में कितना भंडारण है?

भारत सहित दुनिया के कई देश इमरजेंसी में अपने लिए तेल का भंडारण कर रखते हैं ताकि युद्ध की स्थिति या अचानक तेल सप्लाई का बंद होना, कोई भी परिस्थिति में अचानक देश में मुसीबत ना आए इसके लिए कुछ दिनों के लिए भंडारण करके रखते हैं। वर्तमान में भारत में तेल सप्लाई बंद हो जाए तो सरकार के पास इतना भंडारण है कि 9 दिन तक पूरे देश का पूर्ति कर सकता है।

इसके अलावा हमारे देश के प्राइवेट कंपनियों के पास लगभग ,हमारे देश में एक दिन की कुल खपत के हिसाब से 65 दिन का भंडारण है , उस हिसाब से कुल लगभग 74 दिन का भंडारण है, अगर देश में आज सप्लाई बंद हो तो ढाई महीने तक देश में तेल की समस्या नहीं होगा।

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निष्कर्ष

तेल की खरीददारी से लेकर पेट्रोल पंप तक और आपके वाहन तक पहुंचने में जो कीमत होती है उसमें तेल कंपनियों की खर्च और मुनाफा से लेकर केंद्र और राज्य सरकार की मुनाफा तक शामिल होता है और इसके बाद आपके 1 लीटर पेट्रोल की कीमत₹101 होता है।

 

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